ब्रेकिंग न्यूज़
Commonwealth Games 2026 India Boxers Continue Dominance Several Reach Semifinals Know India Medal Tally Status So Far • Trump Holds Separate Meetings with Zelenskyy and Netanyahu at White House Iran Fires Missiles at US Bases All Intercepted • Lok Sabha Debates Anti Paper Leak Bill Rahul Gandhi Says Students Anger Was Justified Parties Should Respect It Government Calls It Historic Step • UP First Rain Caves in Lucknow Kanpur Expressway Bundelkhand Purvanchal Expressway Faced Same Fate Before Road Quality Questioned
Kanpur Live
Back to Home

Major Political Upheaval in Israel Former Military Chief Gadi Eisenkot Emerges as Challenger Biggest Political Test for Netanyahu

international - Sun Jul 26

Major Political Upheaval in Israel Former Military Chief Gadi Eisenkot Emerges as Challenger Biggest Political Test for Netanyahu
इजरायल की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर होता दिख रहा है। देश के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu को इस बार अपनी राजनीतिक जिंदगी की सबसे बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। पूर्व Israeli Military Chief of Staff Gadi Eisenkot, जो अब केंद्रवादी पार्टी "Yashar" यानी "Straight" के नेता हैं, ने खुलकर राजनीतिक मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है। कौन हैं Gadi Eisenkot: Gadi Eisenkot इजरायल की सेना में एक बेहद सम्मानित और अनुभवी अधिकारी रहे हैं। Chief of Staff के तौर पर उन्होंने इजरायल की सुरक्षा नीतियों को आकार देने में अहम भूमिका निभाई। सेना से रिटायर होने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और अब वो एक centrist यानी मध्यमार्गी पार्टी के नेता के रूप में उभर रहे हैं। उनकी deep security credentials — यानी सुरक्षा और सैन्य मामलों में उनकी गहरी विशेषज्ञता — उन्हें एक ऐसा उम्मीदवार बनाती है जिसे नजरअंदाज करना Netanyahu के लिए आसान नहीं होगा। Netanyahu के सामने चुनौतियां: पिछले तीन सालों से इजरायल युद्ध की स्थिति में रहा है, जिसकी वजह से आम जनता में थकान और निराशा बढ़ी है। लंबे समय तक चले संघर्ष, आर्थिक दबाव और सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं ने Netanyahu की लोकप्रियता को प्रभावित किया है। ऐसे में जब Eisenkot जैसा एक बाहरी लेकिन सुरक्षा मामलों में गहरी पकड़ रखने वाला नेता सामने आता है, तो वो उन voters को आकर्षित कर सकता है जो बदलाव चाहते हैं लेकिन सुरक्षा के मामले में समझौता नहीं करना चाहते। "Outsider with Security Credentials" की रणनीति: राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि Eisenkot की सबसे बड़ी ताकत यही है — वो एक traditional politician नहीं हैं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने अपना पूरा करियर देश की सुरक्षा में बिताया है। यह उन्हें एक अनोखी विश्वसनीयता देता है, खासकर उन मतदाताओं के बीच जो Netanyahu के नेतृत्व से थक चुके हैं लेकिन किसी "कमजोर" विकल्प को स्वीकार नहीं करना चाहते। पश्चिम एशिया में व्यापक अस्थिरता: यह राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय पर आया है जब पूरा पश्चिम एशिया क्षेत्र पहले से ही भारी अस्थिरता से जूझ रहा है — Iran के साथ जारी तनाव, Red Sea में Houthi हमलों से बढ़ता खतरा, और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में लगातार बदलाव। ऐसे नाजुक समय में इजरायल के भीतर राजनीतिक अनिश्चितता पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर असर डाल सकती है। भारत के लिए क्या मायने: भारत और इजरायल के बीच defence, technology और agriculture जैसे क्षेत्रों में गहरे संबंध हैं। इजरायल की घरेलू राजनीति में किसी भी बड़े बदलाव का असर भारत-इजरायल संबंधों की दिशा पर भी पड़ सकता है, हालांकि दोनों देशों के बीच strategic partnership दीर्घकालिक हितों पर आधारित मानी जाती है। आगे क्या होगा: अभी यह स्पष्ट नहीं है कि आने वाले चुनावों में Eisenkot की पार्टी कितनी सफल होगी, लेकिन उनका उभरना इस बात का संकेत है कि इजरायली जनता के बीच बदलाव की चाहत बढ़ रही है। आने वाले महीनों में यह राजनीतिक द्वंद्व और तेज होने की उम्मीद है।

इजरायल की राजनीति में बड़ा उलटफेर — पूर्व सेना प्रमुख Gadi Eisenkot ने खोला मोर्चा, Netanyahu के लिए बना सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती

इजरायल की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर होता दिख रहा है। देश के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu को इस बार अपनी राजनीतिक जिंदगी की सबसे बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। पूर्व Israeli Military Chief of Staff Gadi Eisenkot, जो अब केंद्रवादी पार्टी "Yashar" यानी "Straight" के नेता हैं, ने खुलकर राजनीतिक मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है। कौन हैं Gadi Eisenkot: Gadi Eisenkot इजरायल की सेना में एक बेहद सम्मानित और अनुभवी अधिकारी रहे हैं। Chief of Staff के तौर पर उन्होंने इजरायल की सुरक्षा नीतियों को आकार देने में अहम भूमिका निभाई। सेना से रिटायर होने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और अब वो एक centrist यानी मध्यमार्गी पार्टी के नेता के रूप में उभर रहे हैं। उनकी deep security credentials — यानी सुरक्षा और सैन्य मामलों में उनकी गहरी विशेषज्ञता — उन्हें एक ऐसा उम्मीदवार बनाती है जिसे नजरअंदाज करना Netanyahu के लिए आसान नहीं होगा। Netanyahu के सामने चुनौतियां: पिछले तीन सालों से इजरायल युद्ध की स्थिति में रहा है, जिसकी वजह से आम जनता में थकान और निराशा बढ़ी है। लंबे समय तक चले संघर्ष, आर्थिक दबाव और सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं ने Netanyahu की लोकप्रियता को प्रभावित किया है। ऐसे में जब Eisenkot जैसा एक बाहरी लेकिन सुरक्षा मामलों में गहरी पकड़ रखने वाला नेता सामने आता है, तो वो उन voters को आकर्षित कर सकता है जो बदलाव चाहते हैं लेकिन सुरक्षा के मामले में समझौता नहीं करना चाहते। "Outsider with Security Credentials" की रणनीति: राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि Eisenkot की सबसे बड़ी ताकत यही है — वो एक traditional politician नहीं हैं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने अपना पूरा करियर देश की सुरक्षा में बिताया है। यह उन्हें एक अनोखी विश्वसनीयता देता है, खासकर उन मतदाताओं के बीच जो Netanyahu के नेतृत्व से थक चुके हैं लेकिन किसी "कमजोर" विकल्प को स्वीकार नहीं करना चाहते। पश्चिम एशिया में व्यापक अस्थिरता: यह राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय पर आया है जब पूरा पश्चिम एशिया क्षेत्र पहले से ही भारी अस्थिरता से जूझ रहा है — Iran के साथ जारी तनाव, Red Sea में Houthi हमलों से बढ़ता खतरा, और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में लगातार बदलाव। ऐसे नाजुक समय में इजरायल के भीतर राजनीतिक अनिश्चितता पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर असर डाल सकती है। भारत के लिए क्या मायने: भारत और इजरायल के बीच defence, technology और agriculture जैसे क्षेत्रों में गहरे संबंध हैं। इजरायल की घरेलू राजनीति में किसी भी बड़े बदलाव का असर भारत-इजरायल संबंधों की दिशा पर भी पड़ सकता है, हालांकि दोनों देशों के बीच strategic partnership दीर्घकालिक हितों पर आधारित मानी जाती है। आगे क्या होगा: अभी यह स्पष्ट नहीं है कि आने वाले चुनावों में Eisenkot की पार्टी कितनी सफल होगी, लेकिन उनका उभरना इस बात का संकेत है कि इजरायली जनता के बीच बदलाव की चाहत बढ़ रही है। आने वाले महीनों में यह राजनीतिक द्वंद्व और तेज होने की उम्मीद है।