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Kanpur Nagar Nigam Tender Scam: Action Against Chief Engineer Likely After CDO Probe Finds Firms Registered Without Verification

kanpur - Thu Sep 24

Kanpur Nagar Nigam Tender Scam: Action Against Chief Engineer Likely After CDO Probe Finds Firms Registered Without Verification
मुख्य बातें: कानपुर नगर निगम के टेंडर घोटाले में मुख्य अभियंता मोहम्मद एसएफए जैदी पर कार्रवाई लगभग तय मानी जा रही है। सीडीओ की अगुवाई वाली समिति की जांच में सामने आया कि फर्मों का पंजीकरण बिना भौतिक सत्यापन के किया गया। मंडलायुक्त ने नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव और नगर आयुक्त को मुख्य अभियंता के तबादले और विभागीय कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है। इस मामले में पहले ही पांच ठेकेदारों पर एफआईआर हो चुकी है और पांच फर्में ब्लैकलिस्ट की गई हैं। दो जेई और एक वरिष्ठ लिपिक निलंबित किए जा चुके हैं। कानपुर नगर निगम में पिछले कुछ हफ्तों से चर्चा में रहे टेंडर घोटाले में अब बड़ा मोड़ आया है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार नगर निगम के अभियंत्रण विभाग के मुख्य अभियंता मोहम्मद एसएफए जैदी पर कार्रवाई होना लगभग तय माना जा रहा है। मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) के नेतृत्व में बनी जांच समिति की रिपोर्ट के बाद मंडलायुक्त ने उनके तबादले और विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की है। जांच रिपोर्ट में क्या सामने आया रिपोर्टों के अनुसार जांच समिति ने पाया कि मुख्य अभियंता के स्तर पर फर्मों के दस्तावेजों का न तो ठीक से परीक्षण किया गया और न ही उनका भौतिक सत्यापन कराया गया। इसके बावजूद इन फर्मों का पंजीकरण कर दिया गया और उन्हें अलग-अलग काम भी आवंटित कर दिए गए। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ ठेकेदारों के पास पूरे कागजात नहीं थे, फिर भी उन्हें पंजीकृत कर लिया गया। नियमों के अनुसार फर्मों के पंजीकरण और उनके कामों की निष्पक्ष जांच कराने की मुख्य जिम्मेदारी मुख्य अभियंता की होती है। समिति ने माना कि इस जिम्मेदारी को निभाने में उदासीनता बरती गई। इसी आधार पर मंडलायुक्त ने नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव और नगर आयुक्त को पत्र लिखकर मुख्य अभियंता का तत्काल प्रभाव से तबादला करने और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने की बात कही है। जांच रिपोर्ट शासन को भी भेजी गई है। कब और कैसे बनी जांच समिति नगर निगम में गड़बड़ियों की शिकायतें लगातार सामने आने के बाद मंडलायुक्त के निर्देश पर 29 अगस्त को सीडीओ की निगरानी में तीन सदस्यीय समिति बनाई गई थी। इस समिति ने इन बिंदुओं की जांच की: नगर निगम में पंजीकृत फर्मों के दस्तावेज ठेकेदारों के पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया अलग-अलग टेंडरों में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका वित्तीय वर्ष 2024-25 से अब तक कराए गए कामों की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतें रिपोर्टों के अनुसार नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने भी पहले शासन को पत्र भेजकर मांग की थी कि जांच के लिए मुख्य अभियंता स्तर का कोई दूसरा अधिकारी नियुक्त किया जाए। इसके बाद शासन के निर्देश पर मंडलायुक्त कार्यालय से यह समिति गठित हुई। अब तक क्या-क्या कार्रवाई हो चुकी है इस मामले में पहले भी कई कदम उठाए जा चुके हैं: 25 अगस्त की कार्रवाई: पांच ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। पांच कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया गया। इनमें दिलीप बाजपेई एंटरप्राइजेज, अजय एंटरप्राइजेज, पारसनाथ बिल्डर, तिरुपति और कैला एंटरप्राइजेज शामिल हैं। दो ठेकेदार, संदीप जैन और रज्जन बाजपेई, गिरफ्तार किए गए। रिपोर्टों के अनुसार मामले में सरगना बताए जा रहे गोविंद शर्मा ने हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर रोक ले ली है। कर्मचारियों पर कार्रवाई: फर्मों के पंजीकरण में निगरानी न करने और बिना सत्यापन पंजीकरण के मामले में अभियंत्रण विभाग के वरिष्ठ लिपिक भूपेंद्र सिंह और दो जूनियर इंजीनियर, अमनदीप सिंह और बालेंद्र कुमार, निलंबित किए जा चुके हैं। सालों से एक ही विभाग में तैनात लिपिक संजय कटियार, रहमान और दिनेश प्रसाद का विभाग बदला गया है। इसके साथ ही एक विशेष जांच दल (एसआईटी) भी मामले की अलग से जांच कर रहा है। मुख्य अभियंता पर लगे आरोप नगर निगम में गड़बड़ी उजागर होने के बाद से ही मुख्य अभियंता पर कई आरोप लगते रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार आरोप है कि लखनऊ से तबादला होकर कानपुर आने पर वे अपने साथ तीन ठेकेदारों को लाए थे और उन्हें यहां कई काम दिए गए। कुछ फर्मों को टेंडर में फायदा पहुंचाने का आरोप भी लगा है। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये आरोप हैं और विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। संबंधित अधिकारी को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा। kanpur.live उनका पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रकाशित करेगा। शहर के विकास कामों पर क्या असर नगर निगम शहर की सड़कों, नालियों, स्ट्रीट लाइट, पार्क और सामुदायिक भवनों जैसे जरूरी कामों के लिए जिम्मेदार है। इन कामों के लिए ठेके टेंडर प्रक्रिया से दिए जाते हैं। अगर पंजीकरण और टेंडर की प्रक्रिया में गड़बड़ी होती है, तो इसका सीधा असर काम की गुणवत्ता पर पड़ता है। खराब सड़क, जल्दी टूटने वाली नालियां और अधूरे प्रोजेक्ट अक्सर ऐसी ही गड़बड़ियों का नतीजा होते हैं। इसी वजह से जांच में वित्तीय वर्ष 2024-25 से कराए गए कामों की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतों को भी शामिल किया गया है। शहरवासियों को उम्मीद है कि इस सख्ती के बाद भविष्य में टेंडर प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी होगी। टेंडर प्रक्रिया कैसे काम करती है सामान्य तौर पर सरकारी विभागों में टेंडर प्रक्रिया इस तरह चलती है: फर्म का पंजीकरण: ठेकेदार अपनी फर्म के दस्तावेज, अनुभव प्रमाण पत्र और वित्तीय जानकारी जमा करता है। सत्यापन: विभाग इन दस्तावेजों और फर्म के पते की जांच करता है। टेंडर जारी होना: किसी काम के लिए सार्वजनिक सूचना जारी की जाती है। बोली: पंजीकृत फर्में अपनी दरें जमा करती हैं। आवंटन: नियमों के अनुसार योग्य फर्म को काम दिया जाता है। गुणवत्ता जांच और भुगतान: काम पूरा होने पर जांच के बाद भुगतान होता है। इस मामले में सवाल दूसरे चरण, यानी सत्यापन, पर उठे हैं। अगर सत्यापन ठीक से न हो, तो फर्जी या अयोग्य फर्में भी व्यवस्था में घुस सकती हैं। मंगल भवन विवाद से भी जुड़ा माहौल हाल ही में नगर निगम के मंगल भवन से जुड़ी दोनों समितियों को भंग करने का फैसला भी आया था। यह फैसला भी इसी दौर में आया, जब नगर निगम में टेंडर से जुड़ी गड़बड़ियों पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। ये दोनों मामले दिखाते हैं कि प्रशासन नगर निगम के कामकाज की गहराई से समीक्षा कर रहा है। आगे क्या होगा अब सबकी नजर शासन और नगर विकास विभाग के फैसले पर है। मंडलायुक्त की सिफारिश के बाद मुख्य अभियंता के तबादले और विभागीय कार्रवाई पर आदेश जारी हो सकता है। एसआईटी की जांच भी जारी है, जिसमें आगे और नाम सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। kanpur.live इस मामले के हर अपडेट पर नजर बनाए रखेगा। पारदर्शिता के लिए क्या कदम जरूरी जानकारों का मानना है कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए कुछ ठोस कदम उठाए जा सकते हैं। फर्मों के पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और सार्वजनिक हो, हर पंजीकृत फर्म के पते और दस्तावेजों का नियमित भौतिक सत्यापन हो, और पूरे हुए कामों की गुणवत्ता की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। साथ ही लंबे समय से एक ही पद पर तैनात कर्मचारियों का समय-समय पर तबादला भी व्यवस्था को साफ रखने में मदद करता है। शहरवासी क्या कर सकते हैं अगर आपके इलाके में कोई सड़क, नाली या दूसरा काम खराब गुणवत्ता का हुआ है, तो आप नगर निगम के शिकायत पोर्टल या जनसुनवाई पोर्टल पर इसकी शिकायत कर सकते हैं। शिकायत में काम की जगह, तारीख और फोटो जरूर लगाएं। kanpur.live की राय नगर निगम शहर की रोजमर्रा की सुविधाओं की रीढ़ है। टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता से ही शहरवासियों को बेहतर सड़कें और साफ-सुथरा माहौल मिल सकता है। उम्मीद है कि जांच निष्पक्ष रूप से पूरी होगी। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल प्रश्न 1. नगर निगम टेंडर घोटाले में किस अधिकारी पर कार्रवाई की सिफारिश हुई है? अभियंत्रण विभाग के मुख्य अभियंता मोहम्मद एसएफए जैदी पर। प्रश्न 2. जांच किसने की? मंडलायुक्त के निर्देश पर सीडीओ की निगरानी में बनी तीन सदस्यीय समिति ने। प्रश्न 3. जांच में क्या मिला? रिपोर्टों के अनुसार फर्मों का पंजीकरण बिना दस्तावेजों के परीक्षण और भौतिक सत्यापन के किया गया। प्रश्न 4. अब तक कितने ठेकेदारों पर कार्रवाई हुई है? पांच ठेकेदारों पर एफआईआर हुई, पांच फर्में ब्लैकलिस्ट हुईं और दो ठेकेदार गिरफ्तार हुए। प्रश्न 5. किन कर्मचारियों को निलंबित किया गया है? वरिष्ठ लिपिक भूपेंद्र सिंह और जेई अमनदीप सिंह व बालेंद्र कुमार। प्रश्न 6. क्या एसआईटी भी जांच कर रही है? हां, एसआईटी भी इस मामले की अलग से जांच कर रही है। प्रश्न 7. खराब निर्माण कार्य की शिकायत कैसे करें? नगर निगम के शिकायत पोर्टल या जनसुनवाई पोर्टल पर फोटो और जगह की जानकारी के साथ। स्रोत: जांच रिपोर्ट और अधिकारियों के हवाले से प्रकाशित स्थानीय रिपोर्ट, 24 सितंबर 2026।

नगर निगम टेंडर घोटाला: मुख्य अभियंता पर कार्रवाई तय, सीडीओ जांच में बिना सत्यापन फर्मों के पंजीकरण की बात आई सामने

मुख्य बातें: कानपुर नगर निगम के टेंडर घोटाले में मुख्य अभियंता मोहम्मद एसएफए जैदी पर कार्रवाई लगभग तय मानी जा रही है। सीडीओ की अगुवाई वाली समिति की जांच में सामने आया कि फर्मों का पंजीकरण बिना भौतिक सत्यापन के किया गया। मंडलायुक्त ने नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव और नगर आयुक्त को मुख्य अभियंता के तबादले और विभागीय कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है। इस मामले में पहले ही पांच ठेकेदारों पर एफआईआर हो चुकी है और पांच फर्में ब्लैकलिस्ट की गई हैं। दो जेई और एक वरिष्ठ लिपिक निलंबित किए जा चुके हैं। कानपुर नगर निगम में पिछले कुछ हफ्तों से चर्चा में रहे टेंडर घोटाले में अब बड़ा मोड़ आया है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार नगर निगम के अभियंत्रण विभाग के मुख्य अभियंता मोहम्मद एसएफए जैदी पर कार्रवाई होना लगभग तय माना जा रहा है। मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) के नेतृत्व में बनी जांच समिति की रिपोर्ट के बाद मंडलायुक्त ने उनके तबादले और विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की है। जांच रिपोर्ट में क्या सामने आया रिपोर्टों के अनुसार जांच समिति ने पाया कि मुख्य अभियंता के स्तर पर फर्मों के दस्तावेजों का न तो ठीक से परीक्षण किया गया और न ही उनका भौतिक सत्यापन कराया गया। इसके बावजूद इन फर्मों का पंजीकरण कर दिया गया और उन्हें अलग-अलग काम भी आवंटित कर दिए गए। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ ठेकेदारों के पास पूरे कागजात नहीं थे, फिर भी उन्हें पंजीकृत कर लिया गया। नियमों के अनुसार फर्मों के पंजीकरण और उनके कामों की निष्पक्ष जांच कराने की मुख्य जिम्मेदारी मुख्य अभियंता की होती है। समिति ने माना कि इस जिम्मेदारी को निभाने में उदासीनता बरती गई। इसी आधार पर मंडलायुक्त ने नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव और नगर आयुक्त को पत्र लिखकर मुख्य अभियंता का तत्काल प्रभाव से तबादला करने और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने की बात कही है। जांच रिपोर्ट शासन को भी भेजी गई है। कब और कैसे बनी जांच समिति नगर निगम में गड़बड़ियों की शिकायतें लगातार सामने आने के बाद मंडलायुक्त के निर्देश पर 29 अगस्त को सीडीओ की निगरानी में तीन सदस्यीय समिति बनाई गई थी। इस समिति ने इन बिंदुओं की जांच की: नगर निगम में पंजीकृत फर्मों के दस्तावेज ठेकेदारों के पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया अलग-अलग टेंडरों में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका वित्तीय वर्ष 2024-25 से अब तक कराए गए कामों की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतें रिपोर्टों के अनुसार नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने भी पहले शासन को पत्र भेजकर मांग की थी कि जांच के लिए मुख्य अभियंता स्तर का कोई दूसरा अधिकारी नियुक्त किया जाए। इसके बाद शासन के निर्देश पर मंडलायुक्त कार्यालय से यह समिति गठित हुई। अब तक क्या-क्या कार्रवाई हो चुकी है इस मामले में पहले भी कई कदम उठाए जा चुके हैं: 25 अगस्त की कार्रवाई: पांच ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। पांच कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया गया। इनमें दिलीप बाजपेई एंटरप्राइजेज, अजय एंटरप्राइजेज, पारसनाथ बिल्डर, तिरुपति और कैला एंटरप्राइजेज शामिल हैं। दो ठेकेदार, संदीप जैन और रज्जन बाजपेई, गिरफ्तार किए गए। रिपोर्टों के अनुसार मामले में सरगना बताए जा रहे गोविंद शर्मा ने हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर रोक ले ली है। कर्मचारियों पर कार्रवाई: फर्मों के पंजीकरण में निगरानी न करने और बिना सत्यापन पंजीकरण के मामले में अभियंत्रण विभाग के वरिष्ठ लिपिक भूपेंद्र सिंह और दो जूनियर इंजीनियर, अमनदीप सिंह और बालेंद्र कुमार, निलंबित किए जा चुके हैं। सालों से एक ही विभाग में तैनात लिपिक संजय कटियार, रहमान और दिनेश प्रसाद का विभाग बदला गया है। इसके साथ ही एक विशेष जांच दल (एसआईटी) भी मामले की अलग से जांच कर रहा है। मुख्य अभियंता पर लगे आरोप नगर निगम में गड़बड़ी उजागर होने के बाद से ही मुख्य अभियंता पर कई आरोप लगते रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार आरोप है कि लखनऊ से तबादला होकर कानपुर आने पर वे अपने साथ तीन ठेकेदारों को लाए थे और उन्हें यहां कई काम दिए गए। कुछ फर्मों को टेंडर में फायदा पहुंचाने का आरोप भी लगा है। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये आरोप हैं और विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। संबंधित अधिकारी को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा। kanpur.live उनका पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रकाशित करेगा। शहर के विकास कामों पर क्या असर नगर निगम शहर की सड़कों, नालियों, स्ट्रीट लाइट, पार्क और सामुदायिक भवनों जैसे जरूरी कामों के लिए जिम्मेदार है। इन कामों के लिए ठेके टेंडर प्रक्रिया से दिए जाते हैं। अगर पंजीकरण और टेंडर की प्रक्रिया में गड़बड़ी होती है, तो इसका सीधा असर काम की गुणवत्ता पर पड़ता है। खराब सड़क, जल्दी टूटने वाली नालियां और अधूरे प्रोजेक्ट अक्सर ऐसी ही गड़बड़ियों का नतीजा होते हैं। इसी वजह से जांच में वित्तीय वर्ष 2024-25 से कराए गए कामों की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतों को भी शामिल किया गया है। शहरवासियों को उम्मीद है कि इस सख्ती के बाद भविष्य में टेंडर प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी होगी। टेंडर प्रक्रिया कैसे काम करती है सामान्य तौर पर सरकारी विभागों में टेंडर प्रक्रिया इस तरह चलती है: फर्म का पंजीकरण: ठेकेदार अपनी फर्म के दस्तावेज, अनुभव प्रमाण पत्र और वित्तीय जानकारी जमा करता है। सत्यापन: विभाग इन दस्तावेजों और फर्म के पते की जांच करता है। टेंडर जारी होना: किसी काम के लिए सार्वजनिक सूचना जारी की जाती है। बोली: पंजीकृत फर्में अपनी दरें जमा करती हैं। आवंटन: नियमों के अनुसार योग्य फर्म को काम दिया जाता है। गुणवत्ता जांच और भुगतान: काम पूरा होने पर जांच के बाद भुगतान होता है। इस मामले में सवाल दूसरे चरण, यानी सत्यापन, पर उठे हैं। अगर सत्यापन ठीक से न हो, तो फर्जी या अयोग्य फर्में भी व्यवस्था में घुस सकती हैं। मंगल भवन विवाद से भी जुड़ा माहौल हाल ही में नगर निगम के मंगल भवन से जुड़ी दोनों समितियों को भंग करने का फैसला भी आया था। यह फैसला भी इसी दौर में आया, जब नगर निगम में टेंडर से जुड़ी गड़बड़ियों पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। ये दोनों मामले दिखाते हैं कि प्रशासन नगर निगम के कामकाज की गहराई से समीक्षा कर रहा है। आगे क्या होगा अब सबकी नजर शासन और नगर विकास विभाग के फैसले पर है। मंडलायुक्त की सिफारिश के बाद मुख्य अभियंता के तबादले और विभागीय कार्रवाई पर आदेश जारी हो सकता है। एसआईटी की जांच भी जारी है, जिसमें आगे और नाम सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। kanpur.live इस मामले के हर अपडेट पर नजर बनाए रखेगा। पारदर्शिता के लिए क्या कदम जरूरी जानकारों का मानना है कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए कुछ ठोस कदम उठाए जा सकते हैं। फर्मों के पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और सार्वजनिक हो, हर पंजीकृत फर्म के पते और दस्तावेजों का नियमित भौतिक सत्यापन हो, और पूरे हुए कामों की गुणवत्ता की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। साथ ही लंबे समय से एक ही पद पर तैनात कर्मचारियों का समय-समय पर तबादला भी व्यवस्था को साफ रखने में मदद करता है। शहरवासी क्या कर सकते हैं अगर आपके इलाके में कोई सड़क, नाली या दूसरा काम खराब गुणवत्ता का हुआ है, तो आप नगर निगम के शिकायत पोर्टल या जनसुनवाई पोर्टल पर इसकी शिकायत कर सकते हैं। शिकायत में काम की जगह, तारीख और फोटो जरूर लगाएं। kanpur.live की राय नगर निगम शहर की रोजमर्रा की सुविधाओं की रीढ़ है। टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता से ही शहरवासियों को बेहतर सड़कें और साफ-सुथरा माहौल मिल सकता है। उम्मीद है कि जांच निष्पक्ष रूप से पूरी होगी। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल प्रश्न 1. नगर निगम टेंडर घोटाले में किस अधिकारी पर कार्रवाई की सिफारिश हुई है? अभियंत्रण विभाग के मुख्य अभियंता मोहम्मद एसएफए जैदी पर। प्रश्न 2. जांच किसने की? मंडलायुक्त के निर्देश पर सीडीओ की निगरानी में बनी तीन सदस्यीय समिति ने। प्रश्न 3. जांच में क्या मिला? रिपोर्टों के अनुसार फर्मों का पंजीकरण बिना दस्तावेजों के परीक्षण और भौतिक सत्यापन के किया गया। प्रश्न 4. अब तक कितने ठेकेदारों पर कार्रवाई हुई है? पांच ठेकेदारों पर एफआईआर हुई, पांच फर्में ब्लैकलिस्ट हुईं और दो ठेकेदार गिरफ्तार हुए। प्रश्न 5. किन कर्मचारियों को निलंबित किया गया है? वरिष्ठ लिपिक भूपेंद्र सिंह और जेई अमनदीप सिंह व बालेंद्र कुमार। प्रश्न 6. क्या एसआईटी भी जांच कर रही है? हां, एसआईटी भी इस मामले की अलग से जांच कर रही है। प्रश्न 7. खराब निर्माण कार्य की शिकायत कैसे करें? नगर निगम के शिकायत पोर्टल या जनसुनवाई पोर्टल पर फोटो और जगह की जानकारी के साथ। स्रोत: जांच रिपोर्ट और अधिकारियों के हवाले से प्रकाशित स्थानीय रिपोर्ट, 24 सितंबर 2026।