Kanpur Metro Excavation Cracks 5 Houses — Families in Fear, UPMRC Denies Allegations
kanpur - Fri Jul 10

कानपुर मेट्रो का विस्तार काम तो जोरों पर है, लेकिन इसकी भारी कीमत आसपास के मकान मालिक चुका रहे हैं। मेट्रो की खोदाई की वजह से पांच मकानों में गहरी दरारें पड़ गई हैं। दीवारें कांप रही हैं और परिवार डर के साए में जी रहे हैं। पर UPMRC यानी उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने इन आरोपों को सिरे से नकार दिया है।
क्या हो रहा है जमीन पर:
मेट्रो के Phase 2 construction के तहत कानपुर में heavy excavation का काम चल रहा है। Underground tunneling और foundation work की वजह से जमीन में vibrations होती हैं। इन्हीं vibrations की वजह से पास के पुराने मकानों में दरारें आ रही हैं।
पांच परिवारों ने मीडिया को बताया कि उनके घरों की दीवारों में पहले छोटी-छोटी दरारें थीं जो अब बड़ी हो गई हैं। छत से पलस्तर गिर रहा है। कुछ परिवारों ने घर छोड़ने की भी बात कही है।
UPMRC का जवाब:
UPMRC के अधिकारियों ने कहा है कि construction internationally approved standards के मुताबिक हो रहा है। उनका कहना है कि जो दरारें दिख रही हैं वो पहले से थीं — मेट्रो खोदाई की वजह से नहीं आई हैं। UPMRC ने एक technical team भेजकर survey कराने की बात भी कही है।
पुराने मकानों की असली समस्या:
कानपुर के कई इलाकों में 50-70 साल पुराने मकान हैं जिनकी foundations कमजोर हो चुकी हैं। Heavy vibrations इन पुरानी buildings के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं।
Experts का कहना है कि Metro projects में construction से पहले और बाद में surrounding buildings की structural audit होनी चाहिए। अगर किसी building को नुकसान पहुंचा तो compensation देना होगा।
पीड़ित परिवारों की मांग:
प्रभावित परिवारों ने मांग की है कि UPMRC उनके मकानों का independent structural survey कराए। अगर नुकसान मेट्रो खोदाई की वजह से है तो मुआवजा दिया जाए।
Metro का महत्व और जिम्मेदारी:
कानपुर मेट्रो शहर के लिए जरूरी है — इसमें कोई शक नहीं। लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी है कि construction process में आम नागरिकों को नुकसान न हो।
कानपुर मेट्रो की खोदाई से कांपे मकान — 5 घरों में पड़ीं गहरी दरारें, परिवार दहशत में, UPMRC ने नकारे आरोप
कानपुर मेट्रो का विस्तार काम तो जोरों पर है, लेकिन इसकी भारी कीमत आसपास के मकान मालिक चुका रहे हैं। मेट्रो की खोदाई की वजह से पांच मकानों में गहरी दरारें पड़ गई हैं। दीवारें कांप रही हैं और परिवार डर के साए में जी रहे हैं। पर UPMRC यानी उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने इन आरोपों को सिरे से नकार दिया है।
क्या हो रहा है जमीन पर:
मेट्रो के Phase 2 construction के तहत कानपुर में heavy excavation का काम चल रहा है। Underground tunneling और foundation work की वजह से जमीन में vibrations होती हैं। इन्हीं vibrations की वजह से पास के पुराने मकानों में दरारें आ रही हैं।
पांच परिवारों ने मीडिया को बताया कि उनके घरों की दीवारों में पहले छोटी-छोटी दरारें थीं जो अब बड़ी हो गई हैं। छत से पलस्तर गिर रहा है। कुछ परिवारों ने घर छोड़ने की भी बात कही है।
UPMRC का जवाब:
UPMRC के अधिकारियों ने कहा है कि construction internationally approved standards के मुताबिक हो रहा है। उनका कहना है कि जो दरारें दिख रही हैं वो पहले से थीं — मेट्रो खोदाई की वजह से नहीं आई हैं। UPMRC ने एक technical team भेजकर survey कराने की बात भी कही है।
पुराने मकानों की असली समस्या:
कानपुर के कई इलाकों में 50-70 साल पुराने मकान हैं जिनकी foundations कमजोर हो चुकी हैं। Heavy vibrations इन पुरानी buildings के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं।
Experts का कहना है कि Metro projects में construction से पहले और बाद में surrounding buildings की structural audit होनी चाहिए। अगर किसी building को नुकसान पहुंचा तो compensation देना होगा।
पीड़ित परिवारों की मांग:
प्रभावित परिवारों ने मांग की है कि UPMRC उनके मकानों का independent structural survey कराए। अगर नुकसान मेट्रो खोदाई की वजह से है तो मुआवजा दिया जाए।
Metro का महत्व और जिम्मेदारी:
कानपुर मेट्रो शहर के लिए जरूरी है — इसमें कोई शक नहीं। लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी है कि construction process में आम नागरिकों को नुकसान न हो।