Kanpur Fake Degree Racket Busted 25000 Reward Counselor Arrested 58 Lakh Transaction Exposed
crime - Wed Jul 01

कानपुर पुलिस ने एक बड़े फर्जी डिग्री रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस मामले में गाजियाबाद से 25 हजार रुपये के इनामी काउंसलर मयंक भारद्वाज को गिरफ्तार किया गया है। जांच में 58 लाख रुपये के संदिग्ध लेनदेन का बड़ा खुलासा हुआ है।
क्या है यह रैकेट?
फर्जी डिग्री रैकेट एक ऐसा संगठित अपराध है जिसमें छात्रों को पैसे लेकर बिना पढ़ाई कराए नकली डिग्री और मार्कशीट दी जाती है। यह डिग्रियां असली विश्वविद्यालयों के नाम पर बनाई जाती हैं जिनसे छात्र सरकारी और प्राइवेट नौकरियों में झूठे क्रेडेंशियल के आधार पर भर्ती हो जाते हैं।
मयंक भारद्वाज की भूमिका
जांच में सामने आया है कि मयंक भारद्वाज इस रैकेट का एक प्रमुख ऑपरेटर था। वह छात्रों को "आसानी से डिग्री दिलाने" का वादा करके उनसे मोटी रकम वसूलता था। 58 लाख के लेनदेन से पता चलता है कि यह रैकेट काफी बड़े पैमाने पर चल रहा था।
पुलिस की कार्रवाई
कानपुर पुलिस को लंबे समय से इस रैकेट की सूचना मिल रही थी। गहन जांच के बाद पुलिस ने मयंक भारद्वाज को गाजियाबाद से गिरफ्तार किया।
पुलिस अब इस रैकेट के अन्य सदस्यों और इसमें शामिल संभावित संस्थाओं की जांच कर रही है।
फर्जी डिग्री का असर
फर्जी डिग्री धारक जब सरकारी नौकरी में आते हैं तो:
योग्य उम्मीदवारों का हक मारा जाता है
सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होती है
कानूनी कार्रवाई होने पर व्यक्ति की नौकरी और प्रतिष्ठा दोनों जाते हैं
युवाओं के लिए सावधानी
अगर कोई आपको "आसानी से डिग्री दिलाने" का वादा करे:
तुरंत सतर्क हो जाएं — यह जालसाजी है
ऐसे व्यक्ति की शिकायत पुलिस को करें
अपनी मेहनत और लगन से शिक्षा प्राप्त करें
शिकायत के लिए: UP STF Helpline या नजदीकी पुलिस थाना
कानपुर Crime & Law की खबरों के लिए Kanpur Live पढ़ते रहें।
कानपुर में फर्जी डिग्री रैकेट का भंडाफोड़ — 25 हजार का इनामी काउंसलर गिरफ्तार, 58 लाख के लेनदेन का खुलासा
कानपुर पुलिस ने एक बड़े फर्जी डिग्री रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस मामले में गाजियाबाद से 25 हजार रुपये के इनामी काउंसलर मयंक भारद्वाज को गिरफ्तार किया गया है। जांच में 58 लाख रुपये के संदिग्ध लेनदेन का बड़ा खुलासा हुआ है।
क्या है यह रैकेट?
फर्जी डिग्री रैकेट एक ऐसा संगठित अपराध है जिसमें छात्रों को पैसे लेकर बिना पढ़ाई कराए नकली डिग्री और मार्कशीट दी जाती है। यह डिग्रियां असली विश्वविद्यालयों के नाम पर बनाई जाती हैं जिनसे छात्र सरकारी और प्राइवेट नौकरियों में झूठे क्रेडेंशियल के आधार पर भर्ती हो जाते हैं।
मयंक भारद्वाज की भूमिका
जांच में सामने आया है कि मयंक भारद्वाज इस रैकेट का एक प्रमुख ऑपरेटर था। वह छात्रों को "आसानी से डिग्री दिलाने" का वादा करके उनसे मोटी रकम वसूलता था। 58 लाख के लेनदेन से पता चलता है कि यह रैकेट काफी बड़े पैमाने पर चल रहा था।
पुलिस की कार्रवाई
कानपुर पुलिस को लंबे समय से इस रैकेट की सूचना मिल रही थी। गहन जांच के बाद पुलिस ने मयंक भारद्वाज को गाजियाबाद से गिरफ्तार किया।
पुलिस अब इस रैकेट के अन्य सदस्यों और इसमें शामिल संभावित संस्थाओं की जांच कर रही है।
फर्जी डिग्री का असर
फर्जी डिग्री धारक जब सरकारी नौकरी में आते हैं तो:
योग्य उम्मीदवारों का हक मारा जाता है
सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होती है
कानूनी कार्रवाई होने पर व्यक्ति की नौकरी और प्रतिष्ठा दोनों जाते हैं
युवाओं के लिए सावधानी
अगर कोई आपको "आसानी से डिग्री दिलाने" का वादा करे:
तुरंत सतर्क हो जाएं — यह जालसाजी है
ऐसे व्यक्ति की शिकायत पुलिस को करें
अपनी मेहनत और लगन से शिक्षा प्राप्त करें
शिकायत के लिए: UP STF Helpline या नजदीकी पुलिस थाना
कानपुर Crime & Law की खबरों के लिए Kanpur Live पढ़ते रहें।