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Kanpur: 13-Year-Old Prakhar's Suspicious Death Now Murder Case — Court Orders FIR Against Father, Grandparents

crime - Sun Jul 12

 Kanpur: 13-Year-Old Prakhar's Suspicious Death Now Murder Case — Court Orders FIR Against Father, Grandparents
कानपुर के NRI City इलाके में रहने वाले 13 साल के प्रखर त्रिवेदी की मौत का मामला अब हत्याकांड बन गया है। महीनों तक मां की गुहार को नजरअंदाज करने के बाद अब कोर्ट के सख्त आदेश पर पिता, दादा और दादी समेत चार लोगों पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मामला न सिर्फ एक परिवार की त्रासदी है बल्कि पुलिस सिस्टम की बड़ी विफलता को भी उजागर करता है। क्या है पूरा मामला: प्रखर त्रिवेदी की मौत कुछ महीने पहले संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी। मां ने शुरू से ही आरोप लगाया कि यह हत्या है — कोई accident नहीं। उनका कहना था कि घर में लंबे समय से संपत्ति विवाद चल रहा था। पति की तरफ से लगातार मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न भी हो रहा था। इसी माहौल में प्रखर की जान गई। जब मां थाने पहुंची और FIR दर्ज कराने की कोशिश की तो पुलिस ने उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया। कई बार शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस का रवैया था कि यह पारिवारिक मामला है। हार न मानने वाली मां ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। Court ने मामले को गंभीरता से लिया और पुलिस को सख्त आदेश दिया कि तुरंत FIR दर्ज की जाए। Court के आदेश के बाद पिता, दादा, दादी और एक अन्य व्यक्ति पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस की लापरवाही — गंभीर सवाल: यह मामला कई बड़े सवाल उठाता है। आखिर पुलिस ने इतने लंबे समय तक FIR क्यों नहीं दर्ज की? क्या आरोपियों का कोई राजनीतिक या प्रशासनिक रसूख था? क्या किसी दबाव में पुलिस ने आंखें मूंद लीं? कानपुर में पिछले कुछ सालों में ऐसे कई मामले देखने को मिले हैं जहां पीड़ित परिवार पुलिस के दरवाजे पर गिड़गिड़ाते रहते हैं लेकिन कार्रवाई नहीं होती। जब तक Court का डंडा न पड़े, सिस्टम हिलता नहीं। यह लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था दोनों के लिए शर्मनाक है। इस मामले में एक मां महीनों तक अकेले लड़ती रही। उसने पुलिस थाने के चक्कर लगाए, दरवाजे खटखटाए, गुहार लगाई। लेकिन कोई नहीं सुना। अंततः Court ने सुना। संपत्ति विवाद — बच्चों की जान: UP में संपत्ति विवाद एक बड़ी सामाजिक समस्या है। परिवारों में जमीन और मकान को लेकर झगड़े होते हैं और इन झगड़ों में सबसे ज्यादा नुकसान बच्चों को होता है। प्रखर का मामला इसी की दर्दनाक मिसाल है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में पुलिस को संवेदनशीलता से काम लेना चाहिए। जब कोई मां अपने बच्चे की हत्या की शिकायत लेकर आती है तो उसे नजरअंदाज करना न सिर्फ अमानवीय है बल्कि कानूनी रूप से भी गलत है। आगे क्या होगा: अब जब Court के आदेश पर FIR दर्ज हो गई है तो जांच आगे बढ़ेगी। पुलिस को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करनी होगी — forensic evidence, गवाहों के बयान और medical reports सब की जांच होगी। मां को उम्मीद है कि अब न्याय मिलेगा। पूरे कानपुर की नजरें इस मामले पर हैं। प्रखर को इंसाफ मिले — यही एक मां की दुआ है।

कानपुर: NRI City में 13 साल के प्रखर की मौत अब बनी हत्याकांड — कोर्ट के आदेश पर पिता, दादा-दादी पर हत्या का मुकदमा

कानपुर के NRI City इलाके में रहने वाले 13 साल के प्रखर त्रिवेदी की मौत का मामला अब हत्याकांड बन गया है। महीनों तक मां की गुहार को नजरअंदाज करने के बाद अब कोर्ट के सख्त आदेश पर पिता, दादा और दादी समेत चार लोगों पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मामला न सिर्फ एक परिवार की त्रासदी है बल्कि पुलिस सिस्टम की बड़ी विफलता को भी उजागर करता है। क्या है पूरा मामला: प्रखर त्रिवेदी की मौत कुछ महीने पहले संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी। मां ने शुरू से ही आरोप लगाया कि यह हत्या है — कोई accident नहीं। उनका कहना था कि घर में लंबे समय से संपत्ति विवाद चल रहा था। पति की तरफ से लगातार मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न भी हो रहा था। इसी माहौल में प्रखर की जान गई। जब मां थाने पहुंची और FIR दर्ज कराने की कोशिश की तो पुलिस ने उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया। कई बार शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस का रवैया था कि यह पारिवारिक मामला है। हार न मानने वाली मां ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। Court ने मामले को गंभीरता से लिया और पुलिस को सख्त आदेश दिया कि तुरंत FIR दर्ज की जाए। Court के आदेश के बाद पिता, दादा, दादी और एक अन्य व्यक्ति पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस की लापरवाही — गंभीर सवाल: यह मामला कई बड़े सवाल उठाता है। आखिर पुलिस ने इतने लंबे समय तक FIR क्यों नहीं दर्ज की? क्या आरोपियों का कोई राजनीतिक या प्रशासनिक रसूख था? क्या किसी दबाव में पुलिस ने आंखें मूंद लीं? कानपुर में पिछले कुछ सालों में ऐसे कई मामले देखने को मिले हैं जहां पीड़ित परिवार पुलिस के दरवाजे पर गिड़गिड़ाते रहते हैं लेकिन कार्रवाई नहीं होती। जब तक Court का डंडा न पड़े, सिस्टम हिलता नहीं। यह लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था दोनों के लिए शर्मनाक है। इस मामले में एक मां महीनों तक अकेले लड़ती रही। उसने पुलिस थाने के चक्कर लगाए, दरवाजे खटखटाए, गुहार लगाई। लेकिन कोई नहीं सुना। अंततः Court ने सुना। संपत्ति विवाद — बच्चों की जान: UP में संपत्ति विवाद एक बड़ी सामाजिक समस्या है। परिवारों में जमीन और मकान को लेकर झगड़े होते हैं और इन झगड़ों में सबसे ज्यादा नुकसान बच्चों को होता है। प्रखर का मामला इसी की दर्दनाक मिसाल है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में पुलिस को संवेदनशीलता से काम लेना चाहिए। जब कोई मां अपने बच्चे की हत्या की शिकायत लेकर आती है तो उसे नजरअंदाज करना न सिर्फ अमानवीय है बल्कि कानूनी रूप से भी गलत है। आगे क्या होगा: अब जब Court के आदेश पर FIR दर्ज हो गई है तो जांच आगे बढ़ेगी। पुलिस को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करनी होगी — forensic evidence, गवाहों के बयान और medical reports सब की जांच होगी। मां को उम्मीद है कि अब न्याय मिलेगा। पूरे कानपुर की नजरें इस मामले पर हैं। प्रखर को इंसाफ मिले — यही एक मां की दुआ है।