Farmer Ends Life Unable to Pay Loan Installments — UP's Devastating Debt Crisis Among Farmers
kanpur - Mon Jul 06

उत्तर प्रदेश से एक बेहद दर्दनाक खबर आई है। एक किसान जो महीनों से loan की किश्त नहीं भर पा रहा था, आखिरकार इतना टूट गया कि उसने जहर खाकर अपनी जान दे दी। परिवार में कोहराम मच गया।
क्या हुआ:
परिवार के अनुसार किसान पर बैंक और साहूकार दोनों का कर्ज था। फसल का सही दाम नहीं मिला। ऊपर से मौसम की मार — इस साल बारिश देर से आई जिससे फसल भी प्रभावित हुई। हर तरफ से दबाव बढ़ता जा रहा था। आखिरकार उसने जीवन समाप्त करने का रास्ता चुना।
UP में किसानों की हालत:
UP में खेती करने वाले 70% से ज्यादा किसान छोटे और सीमांत हैं। इनके पास 2 हेक्टेयर से कम जमीन है। यह किसान न तो बड़ी investment कर सकते हैं, न ही market fluctuations झेल सकते हैं।
PM Kisan Samman Nidhi के तहत सालाना ₹6000 मिलते हैं — जो बढ़ती input costs के सामने ऊंट के मुंह में जीरा है।
समस्या की जड़:
MSP यानी Minimum Support Price सिर्फ कुछ फसलों पर मिलती है। Private traders और middlemen किसानों को कम दाम देते हैं। Storage facilities नहीं होने से फसल खराब हो जाती है।
सरकार से मांग:
किसान organizations ने मांग की है कि UP सरकार तुरंत एक Farmer Distress Helpline शुरू करे। जिन किसानों पर कर्ज है उनके लिए special loan restructuring scheme लाई जाए। आत्महत्या पीड़ित परिवारों को तत्काल मुआवजा दिया जाए।
किश्त न भर पाने से टूटा किसान — जहर खाकर दी जान, UP में कर्ज के बोझ तले दबे किसानों की दर्दनाक कहानी
उत्तर प्रदेश से एक बेहद दर्दनाक खबर आई है। एक किसान जो महीनों से loan की किश्त नहीं भर पा रहा था, आखिरकार इतना टूट गया कि उसने जहर खाकर अपनी जान दे दी। परिवार में कोहराम मच गया।
क्या हुआ:
परिवार के अनुसार किसान पर बैंक और साहूकार दोनों का कर्ज था। फसल का सही दाम नहीं मिला। ऊपर से मौसम की मार — इस साल बारिश देर से आई जिससे फसल भी प्रभावित हुई। हर तरफ से दबाव बढ़ता जा रहा था। आखिरकार उसने जीवन समाप्त करने का रास्ता चुना।
UP में किसानों की हालत:
UP में खेती करने वाले 70% से ज्यादा किसान छोटे और सीमांत हैं। इनके पास 2 हेक्टेयर से कम जमीन है। यह किसान न तो बड़ी investment कर सकते हैं, न ही market fluctuations झेल सकते हैं।
PM Kisan Samman Nidhi के तहत सालाना ₹6000 मिलते हैं — जो बढ़ती input costs के सामने ऊंट के मुंह में जीरा है।
समस्या की जड़:
MSP यानी Minimum Support Price सिर्फ कुछ फसलों पर मिलती है। Private traders और middlemen किसानों को कम दाम देते हैं। Storage facilities नहीं होने से फसल खराब हो जाती है।
सरकार से मांग:
किसान organizations ने मांग की है कि UP सरकार तुरंत एक Farmer Distress Helpline शुरू करे। जिन किसानों पर कर्ज है उनके लिए special loan restructuring scheme लाई जाए। आत्महत्या पीड़ित परिवारों को तत्काल मुआवजा दिया जाए।