ब्रेकिंग न्यूज़
Commonwealth Games 2026 India Boxers Continue Dominance Several Reach Semifinals Know India Medal Tally Status So Far • Trump Holds Separate Meetings with Zelenskyy and Netanyahu at White House Iran Fires Missiles at US Bases All Intercepted • Lok Sabha Debates Anti Paper Leak Bill Rahul Gandhi Says Students Anger Was Justified Parties Should Respect It Government Calls It Historic Step • UP First Rain Caves in Lucknow Kanpur Expressway Bundelkhand Purvanchal Expressway Faced Same Fate Before Road Quality Questioned
Kanpur Live
Back to Home

Chromium Poison at Kanpur Fatehpur Border Water in 5 Villages Near Purwamir Unfit for Drinking Villagers in Panic

kanpur - Wed Jul 29

Chromium Poison at Kanpur Fatehpur Border Water in 5 Villages Near Purwamir Unfit for Drinking Villagers in Panic
कानपुर-फतेहपुर बॉर्डर पर स्थित पुरवामीर और उसके आसपास के गांवों में एक गंभीर पर्यावरणीय संकट सामने आया है। यहां के भूजल में क्रोमियम की मात्रा इतनी बढ़ गई है कि पांच गांवों का पानी पीने लायक नहीं रह गया है। यह खबर स्थानीय ग्रामीणों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है, जो सालों से इसी पानी पर निर्भर रहे हैं। कैसे सामने आया यह संकट: स्थानीय पत्रकारों और environmental activists ने जब पुरवामीर और आसपास के इलाकों का दौरा किया, तो पानी के sample लेकर टेस्टिंग कराई गई। रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि इन गांवों के पानी में क्रोमियम, खासकर हानिकारक Hexavalent Chromium यानी Chromium-6, की मात्रा तय मानकों से कहीं अधिक है। यह वही chromium है जो leather tanning industry में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है, और कानपुर इस उद्योग का देश का सबसे बड़ा केंद्र है। सालों से tanneries से निकलने वाला प्रदूषित पानी और waste ठीक तरीके से dispose नहीं किया गया, जिसका नतीजा अब आसपास के गांवों के भूजल में साफ दिखने लगा है। प्रभावित गांवों का हाल: पुरवामीर और उसके आसपास के करीब पांच गांवों में हजारों लोग इस समस्या से प्रभावित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ समय से उन्हें पानी का स्वाद और रंग असामान्य लग रहा था, लेकिन उन्हें इसकी असली वजह का पता नहीं था। अब जब टेस्ट रिपोर्ट सामने आई है, तो पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। कई ग्रामीणों ने बताया कि उनके परिवारों में त्वचा संबंधी समस्याएं, पेट दर्द और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ी हैं, जो शायद इसी दूषित पानी की वजह से हो रही हैं। Chromium Poisoning के स्वास्थ्य पर खतरे: Medical experts के अनुसार, लंबे समय तक Chromium-6 युक्त पानी पीने से किडनी और लिवर को गंभीर नुकसान हो सकता है, त्वचा संबंधी बीमारियां हो सकती हैं, और long-term exposure से कैंसर तक का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर इसका असर और भी गंभीर हो सकता है। प्रशासन की भूमिका पर सवाल: यह घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि आखिर सालों तक यह प्रदूषण बिना किसी ठोस कार्रवाई के कैसे बढ़ता रहा। Pollution Control Board और स्थानीय प्रशासन को नियमित रूप से industrial waste disposal की निगरानी करनी चाहिए थी, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तुरंत साफ पानी की व्यवस्था, प्रभावित इलाकों में medical camps और दोषी tanneries के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। Namami Gange योजना पर भी सवाल: कानपुर से होकर गुजरने वाली गंगा नदी को स्वच्छ बनाने के लिए Namami Gange योजना पर करोड़ों रुपये खर्च हुए हैं। लेकिन अगर आसपास के गांवों का भूजल ही इस तरह प्रदूषित हो रहा है, तो यह सवाल उठता है कि जमीनी स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के उपाय कितने प्रभावी रहे हैं। तत्काल राहत की जरूरत: Environmental experts का कहना है कि सरकार को तुरंत प्रभावित गांवों में पानी के tankers भेजने चाहिए, पूरे क्षेत्र में विस्तृत groundwater testing करानी चाहिए, और लंबी अवधि के लिए एक proper water treatment और supply system स्थापित करना चाहिए। यह मामला सिर्फ पानी की समस्या नहीं, बल्कि हजारों लोगों के स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।

कानपुर-फतेहपुर बॉर्डर पर क्रोमियम का जहर — पुरवामीर के आसपास 5 गांवों का पानी हुआ पीने लायक नहीं, ग्रामीणों में दहशत

कानपुर-फतेहपुर बॉर्डर पर स्थित पुरवामीर और उसके आसपास के गांवों में एक गंभीर पर्यावरणीय संकट सामने आया है। यहां के भूजल में क्रोमियम की मात्रा इतनी बढ़ गई है कि पांच गांवों का पानी पीने लायक नहीं रह गया है। यह खबर स्थानीय ग्रामीणों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है, जो सालों से इसी पानी पर निर्भर रहे हैं। कैसे सामने आया यह संकट: स्थानीय पत्रकारों और environmental activists ने जब पुरवामीर और आसपास के इलाकों का दौरा किया, तो पानी के sample लेकर टेस्टिंग कराई गई। रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि इन गांवों के पानी में क्रोमियम, खासकर हानिकारक Hexavalent Chromium यानी Chromium-6, की मात्रा तय मानकों से कहीं अधिक है। यह वही chromium है जो leather tanning industry में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है, और कानपुर इस उद्योग का देश का सबसे बड़ा केंद्र है। सालों से tanneries से निकलने वाला प्रदूषित पानी और waste ठीक तरीके से dispose नहीं किया गया, जिसका नतीजा अब आसपास के गांवों के भूजल में साफ दिखने लगा है। प्रभावित गांवों का हाल: पुरवामीर और उसके आसपास के करीब पांच गांवों में हजारों लोग इस समस्या से प्रभावित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ समय से उन्हें पानी का स्वाद और रंग असामान्य लग रहा था, लेकिन उन्हें इसकी असली वजह का पता नहीं था। अब जब टेस्ट रिपोर्ट सामने आई है, तो पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। कई ग्रामीणों ने बताया कि उनके परिवारों में त्वचा संबंधी समस्याएं, पेट दर्द और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ी हैं, जो शायद इसी दूषित पानी की वजह से हो रही हैं। Chromium Poisoning के स्वास्थ्य पर खतरे: Medical experts के अनुसार, लंबे समय तक Chromium-6 युक्त पानी पीने से किडनी और लिवर को गंभीर नुकसान हो सकता है, त्वचा संबंधी बीमारियां हो सकती हैं, और long-term exposure से कैंसर तक का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर इसका असर और भी गंभीर हो सकता है। प्रशासन की भूमिका पर सवाल: यह घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि आखिर सालों तक यह प्रदूषण बिना किसी ठोस कार्रवाई के कैसे बढ़ता रहा। Pollution Control Board और स्थानीय प्रशासन को नियमित रूप से industrial waste disposal की निगरानी करनी चाहिए थी, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तुरंत साफ पानी की व्यवस्था, प्रभावित इलाकों में medical camps और दोषी tanneries के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। Namami Gange योजना पर भी सवाल: कानपुर से होकर गुजरने वाली गंगा नदी को स्वच्छ बनाने के लिए Namami Gange योजना पर करोड़ों रुपये खर्च हुए हैं। लेकिन अगर आसपास के गांवों का भूजल ही इस तरह प्रदूषित हो रहा है, तो यह सवाल उठता है कि जमीनी स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के उपाय कितने प्रभावी रहे हैं। तत्काल राहत की जरूरत: Environmental experts का कहना है कि सरकार को तुरंत प्रभावित गांवों में पानी के tankers भेजने चाहिए, पूरे क्षेत्र में विस्तृत groundwater testing करानी चाहिए, और लंबी अवधि के लिए एक proper water treatment और supply system स्थापित करना चाहिए। यह मामला सिर्फ पानी की समस्या नहीं, बल्कि हजारों लोगों के स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।