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40 Years On, Kanpur Parade Massacre Still Haunts the City — When Brother Became Brother's Butcher

kanpur - Fri Jun 12

40 Years On, Kanpur Parade Massacre Still Haunts the City — When Brother Became Brother's Butcher
कानपुर शहर ने अपने इतिहास में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं जिनके जख्म कभी पूरी तरह नहीं भरते। परेड क्षेत्र में हुआ नरसंहार उन्हीं घटनाओं में से एक है, जिसे आज 40 साल बाद भी शहर के बुजुर्ग याद करते हुए सिहर जाते हैं। क्या हुआ था उस दिन? स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, उस दौर में सांप्रदायिक तनाव अपने चरम पर था। परेड इलाका, जो कभी कानपुर की पहचान हुआ करता था, हिंसा की आग में जल उठा। इस दौरान कई परिवार बिखर गए, और कुछ मामलों में तो खून के रिश्ते भी इस नफरत की भेंट चढ़ गए। आज का परेड दशकों बाद आज परेड क्षेत्र पूरी तरह बदल गया है। नई पीढ़ी के ज्यादातर लोग इस इतिहास से अनजान हैं, लेकिन बुजुर्ग पीढ़ी के लिए ये यादें आज भी ताजा हैं। शहर के कई इतिहासकार और सामाजिक कार्यकर्ता मानते हैं कि इस तरह की घटनाओं को याद रखना जरूरी है — ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो। सबक क्या है? कानपुर जैसे औद्योगिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध शहर के लिए, भाईचारा और शांति ही सबसे बड़ी पूंजी रही है। इतिहास के ये अध्याय हमें याद दिलाते हैं कि सामाजिक सौहार्द कितना कीमती है। Kanpur Live शहर के इतिहास से जुड़ी ऐसी ही और कहानियां आगे भी लाता रहेगा।

40 साल बाद भी नहीं बुझी कानपुर परेड नरसंहार की आग — भाई बना भाई का कसाई, जानिए पूरी कहानी

कानपुर शहर ने अपने इतिहास में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं जिनके जख्म कभी पूरी तरह नहीं भरते। परेड क्षेत्र में हुआ नरसंहार उन्हीं घटनाओं में से एक है, जिसे आज 40 साल बाद भी शहर के बुजुर्ग याद करते हुए सिहर जाते हैं। क्या हुआ था उस दिन? स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, उस दौर में सांप्रदायिक तनाव अपने चरम पर था। परेड इलाका, जो कभी कानपुर की पहचान हुआ करता था, हिंसा की आग में जल उठा। इस दौरान कई परिवार बिखर गए, और कुछ मामलों में तो खून के रिश्ते भी इस नफरत की भेंट चढ़ गए। आज का परेड दशकों बाद आज परेड क्षेत्र पूरी तरह बदल गया है। नई पीढ़ी के ज्यादातर लोग इस इतिहास से अनजान हैं, लेकिन बुजुर्ग पीढ़ी के लिए ये यादें आज भी ताजा हैं। शहर के कई इतिहासकार और सामाजिक कार्यकर्ता मानते हैं कि इस तरह की घटनाओं को याद रखना जरूरी है — ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो। सबक क्या है? कानपुर जैसे औद्योगिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध शहर के लिए, भाईचारा और शांति ही सबसे बड़ी पूंजी रही है। इतिहास के ये अध्याय हमें याद दिलाते हैं कि सामाजिक सौहार्द कितना कीमती है। Kanpur Live शहर के इतिहास से जुड़ी ऐसी ही और कहानियां आगे भी लाता रहेगा।