24 Year Old Priyanshu Jumps from 5th Floor of Kanpur Court Suicide Note Blames Childhood Abuse and Mental Stress
kanpur - Sun Jul 19

कानपुर में एक दर्दनाक घटना सामने आई है जिसने सब को झकझोर दिया। 24 साल के प्रियांशु श्रीवास्तव ने कानपुर कोर्ट की 5वीं मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी। उनके suicide note में एक ऐसी दर्दनाक दास्तान है जो पढ़ने वालों की आंखें भिगो देती है।
Suicide Note में क्या लिखा:
प्रियांशु ने अपने suicide note में लिखा कि उन्होंने बचपन में abuse झेला था। यह trauma वो सालों से अपने अंदर दबाए बैठे थे। कभी किसी से नहीं कहा। कभी किसी ने नहीं पूछा। इस mental stress को वो अब और नहीं सह सकते थे।
उन्होंने लिखा — "मैंने बहुत कोशिश की। लेकिन अब थक गया हूं।"
बचपन का Trauma और Mental Health:
Childhood abuse — चाहे physical हो, emotional हो या sexual — इंसान की पूरी जिंदगी पर गहरा असर डालता है। जो बच्चे abuse के शिकार होते हैं वो अक्सर इसे अपने अंदर छुपाए रखते हैं। शर्म, डर और society का judgment उन्हें बोलने से रोकता है।
लेकिन जो दर्द अंदर रहता है वो कभी न कभी बाहर आता है — या तो healing के जरिए, या tragedy के जरिए।
प्रियांशु की कहानी दूसरी है। उनके पास कोई नहीं था जो सुनता। कोई therapist नहीं, कोई support system नहीं।
Mental Health Support की जरूरत:
India में mental health awareness बढ़ रही है लेकिन अभी भी बहुत कम है। Therapy और counseling को अभी भी stigma से देखा जाता है। लोग "पागल" कहलाने से डरते हैं।
अगर प्रियांशु को सही समय पर help मिलती तो शायद यह tragedy न होती।
अगर आप या कोई जानने वाला तनाव में है:
iCall Mental Health Helpline: 9152987821
Vandrevala Foundation: 1860-2662-345 (24/7)
बात करें — जिंदगी कीमती है।
कानपुर कोर्ट में 5वीं मंजिल से कूदकर 24 साल के प्रियांशु ने दी जान — सुसाइड नोट में लिखा 'बचपन का abuse झेला, अब नहीं सह सकता
कानपुर में एक दर्दनाक घटना सामने आई है जिसने सब को झकझोर दिया। 24 साल के प्रियांशु श्रीवास्तव ने कानपुर कोर्ट की 5वीं मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी। उनके suicide note में एक ऐसी दर्दनाक दास्तान है जो पढ़ने वालों की आंखें भिगो देती है।
Suicide Note में क्या लिखा:
प्रियांशु ने अपने suicide note में लिखा कि उन्होंने बचपन में abuse झेला था। यह trauma वो सालों से अपने अंदर दबाए बैठे थे। कभी किसी से नहीं कहा। कभी किसी ने नहीं पूछा। इस mental stress को वो अब और नहीं सह सकते थे।
उन्होंने लिखा — "मैंने बहुत कोशिश की। लेकिन अब थक गया हूं।"
बचपन का Trauma और Mental Health:
Childhood abuse — चाहे physical हो, emotional हो या sexual — इंसान की पूरी जिंदगी पर गहरा असर डालता है। जो बच्चे abuse के शिकार होते हैं वो अक्सर इसे अपने अंदर छुपाए रखते हैं। शर्म, डर और society का judgment उन्हें बोलने से रोकता है।
लेकिन जो दर्द अंदर रहता है वो कभी न कभी बाहर आता है — या तो healing के जरिए, या tragedy के जरिए।
प्रियांशु की कहानी दूसरी है। उनके पास कोई नहीं था जो सुनता। कोई therapist नहीं, कोई support system नहीं।
Mental Health Support की जरूरत:
India में mental health awareness बढ़ रही है लेकिन अभी भी बहुत कम है। Therapy और counseling को अभी भी stigma से देखा जाता है। लोग "पागल" कहलाने से डरते हैं।
अगर प्रियांशु को सही समय पर help मिलती तो शायद यह tragedy न होती।
अगर आप या कोई जानने वाला तनाव में है:
iCall Mental Health Helpline: 9152987821
Vandrevala Foundation: 1860-2662-345 (24/7)
बात करें — जिंदगी कीमती है।