आरपीएफ की सतर्कता से नन्हे फरिश्ते की जान बचाई, अपहरणकर्ताओं के चंगुल से भागकर स्टेशन पहुंचा बालक
आरपीएफ की सतर्कता से नन्हे फरिश्ते की जान बचाई, अपहरणकर्ताओं के चंगुल से भागकर स्टेशन पहुंचा बालक
Kanpur Live News Desk ·

कानपुर। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) कानपुर सेंट्रल के जवानों ने ‘ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते’ के तहत एक बार फिर अपनी सूझबूझ और त्वरित कार्रवाई से एक नाबालिग बालक को संभावित अपहरण से बचा लिया। घटना मंगलवार 9 जून 2026 को प्लेटफॉर्म संख्या 8 पर हुई।
आरपीएफ के अनुसार, बंदोबस्त ड्यूटी पर तैनात उप-निरीक्षक मोहम्मद असलम खान को महिला कांस्टेबल प्रियंका मौर्या ने सूचना दी कि बादामऊ पैसेंजर (गाड़ी संख्या 54336) में एक नाबालिग बालक संदिग्ध हालत में घूम रहा है। तुरंत मौके पर पहुंचकर बच्चे को पूछताछ के लिए बुलाया गया तो वह जोर-जोर से रोने लगा।
आरपीएफ टीम ने बच्चे को शांत कराया और उसे सुरक्षित वातावरण में आरपीएफ पोस्ट पर लाया। प्रभारी निरीक्षक एस.एन. पाटीदार को सूचना दी गई। बालक द्वारा दिए गए मोबाइल नंबर 8565058062 पर संपर्क किया गया। बातचीत में बालक के पिता मुकेश कुमार ने बताया कि उनका बेटा लापता है और थाना अचलगंज (उन्नाव) में इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी है।
बालक की दर्दनाक कहानी
पूछताछ में बालक ने बताया कि वह अपने गांव बाजार बनथर में कलम खरीदने गया था। वहां 3-4 अज्ञात व्यक्तियों ने उसे जबरन एक मारुति वैन में बैठा लिया। कानपुर सेंट्रल स्टेशन के बाहर जब वैन रुकी, तो बच्चे ने मौका देखकर उनके चंगुल से भागकर स्टेशन परिसर में घुसने में सफलता पाई।
आरपीएफ की सूचना पर थाना अचलगंज से कांस्टेबल विमल कुमार (9161767410) और कांस्टेबल प्रमोद कुमार (8449793123) बालक के परिजनों के साथ आरपीएफ पोस्ट पहुंचे। उन्होंने मुकदमा संख्या 0160/2026 (धारा 137(2) बीएनएस) की प्रति सौंपी। बालक को परिजनों को सौंप दिया गया।
आरपीएफ कानपुर सेंट्रल के अधिकारियों ने इस घटना में महिला कांस्टेबल प्रियंका मौर्या और उप-निरीक्षक मोहम्मद असलम खान की सतर्कता की सराहना की। उन्होंने कहा कि रेलवे स्टेशनों पर बच्चों की सुरक्षा के लिए ‘ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते’ के तहत निरंतर निगरानी रखी जा रही है।
पुलिस जांच जारी
उन्नाव पुलिस अब अपहरणकर्ताओं की तलाश में जुटी हुई है। आरपीएफ ने भी स्टेशन सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू कर दी है ताकि वैन और संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान की जा सके।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि रेलवे स्टेशनों पर तैनात आरपीएफ जवान न सिर्फ यात्रियों की सुरक्षा बल्कि खासकर नाबालिग बच्चों की सुरक्षा के लिए मुस्तैद रहते हैं।
आरपीएफ की सतर्कता से नन्हे फरिश्ते की जान बचाई, अपहरणकर्ताओं के चंगुल से भागकर स्टेशन पहुंचा बालक
कानपुर। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) कानपुर सेंट्रल के जवानों ने ‘ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते’ के तहत एक बार फिर अपनी सूझबूझ और त्वरित कार्रवाई से एक नाबालिग बालक को संभावित अपहरण से बचा लिया। घटना मंगलवार 9 जून 2026 को प्लेटफॉर्म संख्या 8 पर हुई।
आरपीएफ के अनुसार, बंदोबस्त ड्यूटी पर तैनात उप-निरीक्षक मोहम्मद असलम खान को महिला कांस्टेबल प्रियंका मौर्या ने सूचना दी कि बादामऊ पैसेंजर (गाड़ी संख्या 54336) में एक नाबालिग बालक संदिग्ध हालत में घूम रहा है। तुरंत मौके पर पहुंचकर बच्चे को पूछताछ के लिए बुलाया गया तो वह जोर-जोर से रोने लगा।
आरपीएफ टीम ने बच्चे को शांत कराया और उसे सुरक्षित वातावरण में आरपीएफ पोस्ट पर लाया। प्रभारी निरीक्षक एस.एन. पाटीदार को सूचना दी गई। बालक द्वारा दिए गए मोबाइल नंबर 8565058062 पर संपर्क किया गया। बातचीत में बालक के पिता मुकेश कुमार ने बताया कि उनका बेटा लापता है और थाना अचलगंज (उन्नाव) में इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी है।
बालक की दर्दनाक कहानी
पूछताछ में बालक ने बताया कि वह अपने गांव बाजार बनथर में कलम खरीदने गया था। वहां 3-4 अज्ञात व्यक्तियों ने उसे जबरन एक मारुति वैन में बैठा लिया। कानपुर सेंट्रल स्टेशन के बाहर जब वैन रुकी, तो बच्चे ने मौका देखकर उनके चंगुल से भागकर स्टेशन परिसर में घुसने में सफलता पाई।
आरपीएफ की सूचना पर थाना अचलगंज से कांस्टेबल विमल कुमार (9161767410) और कांस्टेबल प्रमोद कुमार (8449793123) बालक के परिजनों के साथ आरपीएफ पोस्ट पहुंचे। उन्होंने मुकदमा संख्या 0160/2026 (धारा 137(2) बीएनएस) की प्रति सौंपी। बालक को परिजनों को सौंप दिया गया।
आरपीएफ कानपुर सेंट्रल के अधिकारियों ने इस घटना में महिला कांस्टेबल प्रियंका मौर्या और उप-निरीक्षक मोहम्मद असलम खान की सतर्कता की सराहना की। उन्होंने कहा कि रेलवे स्टेशनों पर बच्चों की सुरक्षा के लिए ‘ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते’ के तहत निरंतर निगरानी रखी जा रही है।
पुलिस जांच जारी
उन्नाव पुलिस अब अपहरणकर्ताओं की तलाश में जुटी हुई है। आरपीएफ ने भी स्टेशन सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू कर दी है ताकि वैन और संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान की जा सके।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि रेलवे स्टेशनों पर तैनात आरपीएफ जवान न सिर्फ यात्रियों की सुरक्षा बल्कि खासकर नाबालिग बच्चों की सुरक्षा के लिए मुस्तैद रहते हैं।
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